इटली और यूरोपियन यूनियन के बीच तनाव

कोरोनावायरस के चलते यदि सबसे अधिक प्रभावित कुछ देश तो सभी देश यूरोपीय यूनियन के हैं वैसे तो सबसे ज्यादा मरने वालों की संख्या तो अमेरिका में है लेकिन यूरोपीय यूनियन में अगर हम कुछ देशों को देख लें जैसे कि स्पेन फ्रांस इटली तो इन तीनों देशों में मौतों देखे तो लगभग 50,000 से अधिक मौतें तो इन्हीं 3 देशों में हुई हालांकि यह पहले ही हेल हेल सर क्राइसिस के संकट से जूझ रहे थे अब यहां पर एक नया संकट इनके सामने आ गया है कि कहीं यूरोपीय यूनियन जो है उसका पतन ना हो जाए यूरोपियन यूनियन कहीं बिखर न जाय
इटली को लेकर पहले ही डाउट है कि इटली शायद यूरोपियन यूनियन को छोड़ सकती है अब जो दूसरा देश किस लाइन में आ गया है वह फ्रांस
यहां पर हम सिर्फ इटली और यूरोपीय यूनियन के टकराव की बात करेंगे।

माइग्रेंट्स क्राइसिस
इस टकराव की शुरुआत होती है 2015 में जब यूरोप की यूरोप में माइग्रेन क्राइसिस हुई थी उस समय बहुत सारे migrants meditarian sea के उस पार से आ रहे थे उस वक्त जर्मनी ने कहा कि हम बहुत सारे प्रवासियों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं लेकिन बाद में जर्मनी अपनी बात से मुकर ते हुए प्रवासियों को अपने देश में जगह नहीं देता है और इसका ज्यादातर दारोमदार इटली पर पड़ता है उसके पीछे एक कारण यह भी है कि इटली बहुत नजदीक था Mediterranean sea के तो जितने भी मायके आए उसमें से लगभग 75 परसेंट इटली में प्रवेश कर गया उस समय यूरोपीय यूनियन नेइटली की कोई खास मदद नहीं की ऐसा ऐसा ऐप पॉपुलर ओपिनियन बनता चला गया क्योंकि जितने भी माइग्रेन स्वभाविक है वहां की अर्थव्यवस्था पर उनका काफी नकारात्मक प्रभाव और इटली के ऊपर इसका काफी ज्यादा खराब प्रभाव पड़ा वहां की अर्थव्यवस्था में गिरावट आने के साथ साथ अनइंप्लॉयमेंट के रेट बढ़ते गए

दूसरा बड़ा कारण ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन अलग हो जाना
जिसमें ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन से अलग हुआ था उस समय एक पोल और कंडक्ट किया गया जिसमें या पूछा गया कि अगला कौन सा देश जो कि यूरोपीय यूनियन को एग्जिट करें यही नहीं 2018 में इटली में बहुत बड़ी घटना घटी पहली बार किसी भी यूरोपीय यूनियन के देश में पहली बार ऐसा हुआ कि जो सरकार वहां चुनी गई वह यूरोप के विरोध में चुनी गई थी
हालांकि वह सरकार अगले ही साल के गई अगले साल जब वह सरकार गिरी तो जो यूरोप के समर्थक लोग थे उनको लगा अच्छा हुआ कि राष्ट्रवाद जो एकदम से उभर रहा था वह एकदम से बंद हो खत्म हो गया
उसके बाद 2018 में एक सर्वे किया गया जिसमें 67 %लोगों का यह विश्वास था कि यूरोपीय यूनियन का हिस्सा बनने में उसका कोई फायदा नहीं हुआ पापुलर ऑपिनियन बनता जा रहा है कि यदि कोई यूरोपीय संगठन नहीं बल्कि दो देश जो इस संगठन को चला रहे हैं उनका इशारा जर्मनी और फ्रांस की ओर
इन सबके बाद सबसे बड़ी समस्या आई कोविड-19 यूरोप के अंदर सबसे अधिक मौते इटली में हुई यूरोपीय यूनियन से संभावित मदद ना मिलने के कारण इटली में राष्ट्रवाद एकदम से फिर से बढ़ने लगा
इटली ने माना है कि वर्ल्ड वॉर टू के बाद सबसे बड़ी महामारी अगर उन्होंने देखी है तो कोविड-19 इटली के वित्त मंत्री का यह मानना है कि इटली की जीडीपी 6%गिर सकती है उनका ह्यूमन रिसोर्स तो खत्म हो ही रहा है साथ ही साथ में उनके लिए फाइनैंशल क्राइसिस भी बढ़ सकती हैं यहां तक कि जो प्रो इटालियन लोग हैं उनको भी ऐसा लगता है कि पड़ोसी देशों ने उनका साथ छोड़ दिया है और अब इटली को यहां पर पापुलर ऑपिनियन बन रहा है वह काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब स्थिति काफी चिंताजनक है और अब सीधे सीधे लोग काफी संख्या में कितने लोग मर रहे हैं हैं और उनका यूरोपीय यूनियन की मदद नहीं करेगा तो आप सोच कर देखिए उनको पहुंची होगी दूसरे देशों में रूस और चीन ने वहां पर अपनी मदद भेजी लेकिन यूरोपीय यूनियन ने मदद नहीं की इसके बाद इटली की सरकार ने कोविड-19 से से निपटने के लिए कोरोना बॉन्ड मकैनिज्म तैयार की है जो कि बेसिकली फाइनेंसियल मकैनिज्म था जिसको जर्मनी नीदरलैंड और फ्रांस ने सिरे से नकार दिया
देख सकते हैं पहले 2015 में माइग्रेन क्राइसिस उसके बाद कुछ सर्वे कोविड-19 अंत में कोरोनावायरस भी यूरोपीय यूनियन ने इटली का साथ नहीं दिया तो इटली में यह जो विचारधारा इस तरीके की बनती जा रही है कि अब हमें अपना रास्ता खुद ही बनाना होगा यूरोपीय यूनियन के ऊपर भरोसा करने की कोई जरूरत नहीं है

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Like Us On Facebook Page

SuperWebTricks Loading...
Need Help? Chat with us